अपने सपने को छोटे बच्चे की तरह पालोगे, तो ही साकार होगा।

Write by: Chandan Jat | 12 June 17
आपने जो भी सपना देखा हों, उसे साकार होने में समय लगता है। अपने सपने को साकार करना हैं तो, अपने सपने को छोटे बच्चे की तरह पालना होगा। तभी जाकर सपना साकार होगा।

सपना देखना किसे पसंद नहीं, हर कोई सपना ​देखता हैं और अपने सपने को साकार करने के लिये कार्य करता रहता हैं। अगर कोई सपना देखेगा ही नहीं, तो कुछ कार्य कर पाएगा ही नहीं।

हम हमारे आस पास जो भी वस्तुएँ देखते है, वह किसी का सपना ही तो हैं। किसी ने कुछ सपना देखा था! तभी तो आज हम इन सब वस्तुओं को देख व उपयोग कर पा रहे हैं।

वह वस्तु "एक हवाई जहाज भी सकती हैं, या छोटी सी छुई भी हो सकती हैं" लेकिन किसी ने तो इन वस्तुओं को बनाने का सपना देखा था। तभी जाकर ये वस्तुए बन पाई हैं। अगर किसी ने कुछ सपना देखा ही नहीं होता, तो आज ये वस्तुएँ नहीं होती। 

केवल सपना देखने से किसी वस्तू का निर्माण नहीं होता। जब हम कोई सपना देखते है तो उसको साकार करने के बारे में सोचते हैं और सपना साकार करने का प्लान बनाते हैं। किसी भी सपने को साकार करने के लिये हमें ज़्यादातर तीन कार्य करने होते हैं। अपने सपने को साकार करने की सोचना। सपने को साकार करने के लिए प्लान बनाना। और जो भी प्लान हैं उसके हिसाब से कार्य करना। तब जाकर किसी सपने को साकार करने का कार्य चूरू होता हैं। लेकिन अपने सपने को साकार करने में, सफल होना हैं तो अपने सपने को छोटे बच्चे की तरह पाले व बड़ा करे। तभी जाकर हम सफल हो पाएँगे।  

अगर किसी का सपना साकार हुआ हैं, तो उसने भी यही कार्य किया हैं। तब जाकर वह अपने सपने को सफल बनाने में कामयाब हो पाये हें।

ऐसा नही है की आज सपना देखा और कल साकार हो गया।

आपने जो भी सपना देखा है उसे साकार करने के लिए, अपने सपने के साथ जीना पड़गा। दिन और रात अपने सपने को साकार बनाने के लिए कार्य करना पड़ेगा। अगर ऐसा नही करेंगे तो थोड़े ही दिनों मे आपका सपना बदल जायेगा।

जो भी निर्णय लिया है उसे पुरा करने के लिए। अपने सपने को छोटे बच्चे की तरह पालो। अपने सपने के साथ उठो उसके साथ चलो, और उसके साथ खेलो यानी हर पल केवल अपना सपना ही दिखना चाहीए।

हमेशा छोटे लेवल से स्टार्ट करो। उगर कुछ सीखना पडे तो सीखो। कुछ छोड़ना पड़े तो छोड़ो।  जब तक सपना साकार नही हो जाता तक किसी भी चीज़ का त्याग करना पड़े तो करो। यानि सपने साकार करने के लिए जो करना पड़े वह करो।

जेसे माँ-बाप अपने बच्चे की परवरिश करने के लिए, कभी कभी अपनी ख़ुशियों को त्याग देते है। वैसे अपने सपने को साकार करने के लिए अपनी ख़ुशियों का  त्याग करोगे तब जाकर सपना साकार होगा।

यानि कम्फर्ट ज़ोन से बाहर आये बगैर सपने को साकार करना नामुमकिन हैं। अगर सपने को साकार करना हैं तो कम्फर्ट ज़ोन से बाहर आना होगा और पुरी तरह से अपने सपने को साकार करने के लिए लग जाना। एवं सफलता की ख़ुशी मनाने का इन्तज़ार करना। आपको सफल होने से कोई रोक नहीं सकता। 

जीतना बड़ा सपना होगा, उतनी ही ज़्यादा मेहनत करनी होगी।
जीतनी ज़्यादा मेहनत करोगे, सफलता भी उतनी ही बड़ी होगी॥

सलेक्ट आपको करना हैं, की आप छोटा सपना देखते हैं या बड़ा। 

सपना देखो सपना देखना गलत नहीं हैं, सपना देखते रहना गलत हैं। सपना देखो और उसको साकार करने में लग जाओ तो सपना सपना नहीं रहता सपना हकीकत में बदल जाता हैं।