​छोटी सोच, पाव की मोष से ज़्यादा ख़तरनाक है।

Write by: Chandan Jat | 15 June 17
​छोटी सोच जीवन मे आगे बढ़ने से रोकती है व पाव की मोष रास्ते मे आगे नही बढ़ने नही देती। छोटी सोच पाव की मोष से ज़्यादा ख़तरनाक होती है।

जिनकी सोच ही छोटी होगी वह हमेशा छोटी छोटी बातों मे ही ऊलजा रहेगा, वह कभी भी कुछ करने से पहले छोटी सोच के कारण दुसरो को दोष देने में लगा रहता है, दुसरो पर आरोप लगाकर ख़ुद बचने का बहाना ढुढता रहता है, हर बात को काट कर अपने आपको बेहतर साबित करने मे लगा रहता है। हो सकता शुरूवात में किसी काम से बचने के लिए करता हो लेकीन धिरे धिरे वह आदत में बदल जाती है, व ख़ुद का ही नुक़सान करवाती है।

लोग सोचते है की ऐसा करने से वह बस जायेंगे, लेकीन ऐसा होता नही। उनके हिसाब से वह सही है फिर भी अपना ही नुक़सान करते है, अपने ही हाथो अपने ही पाव पर कुल्हाड़ी मारते है।
जब तक किसी काम को न करने का बहाना ढुढा जाता है, उतने ही वक़्त में वह काम भी हो सकता है।
अगर नही भी करना है तो खुला मना कर दिजीए। इससे एक ओर फ़ायदा है बहाना नही बनाना पड़ेगा तो आदत छुटेगी।
आदतें कभी भी साथ में जन्म नही लेती वह यही बनती है।
दस बुरी आदतों के मुक़ाबले एक अच्छी आदत ज़्यादा कारागार होती है।
बुरी आदत को छोड़ने के लिए सबसे पहले ख़ुद से नफ़रत करना शुरू करदो कुछ ही दिनों मे आदतें छुटनी शुरू हो जायेगी।
किसी ज़रूरतमन्द की दिल से सहायता करना शुरू करदो धिरे धिरे बुरी आदतें छुटनी चुरू हो जायेगी।
बहाना बनाने से अच्छा है, गलती स्वीकार कर लेना।
किसी चीज़ में गलतीया ढुढने से अच्छा है, उसमें खुबिया ढुढ लेना॥