​ज़बरदस्ती करके, कुछ भी हासील नही कर सकते।

Write by: Chandan Jat | 15 June 17
​जिसने भी ज़बरदस्ती की हमेशा अपना नुक़सान किया है। फिर चाहे वह नुक़सान आपको दिखे या नही दिखे। यह अलग बात है। मगर नुक़सान ज़रूर होता है।

ताली हमेशा दो हाथो से बजती है, एक हाथ से नही। कोई भी सम्बद्ध तभी बरक़रार रहता है, जब वो दोनो तरफ़ से बराबर निभाया गया हो।

आप ज़बरदस्ती करके कुछ भी हासील नही कर सकते। आप ज़बरदस्ती करके ज़्यादा देर तक ख़ुश नही रह सकते। जो कार्य आपसी सहमती से किया जाता है, वह ज़बरदस्ती से करवाना सम्भव नही है।

अगर आप उसे किसी भी तरीखें से करलोगे तो ज़्यादा देर तक चलेगा नही।

फिर बात भले किसी व्यवसाय की हो या किसी सम्बद्ध की हर जगह सहमती ज़रूरी है।

किसी को ज़बरदस्ती से मजबूर करने से जाने या अनजाने में नुक़सान ख़ुद का ही है।

किसी दुकानदार से अगर कुछ सस्ता आईटम ख़रीदने की जिद करोगे, तो क्या वह आपको सस्ता दे देगा। नही! बिलकुल नही वो आपसे ही वसूलेगा लेकीन ख़ुद का नुक़सान नही करेगा। वो एक आईटम आपको सस्ता दे देगा लेकीन किसी दुसरे आईटम या दुसरी बार आपसे ज़रूर वसुल करेगा। यह बात हर जगह लागू होती है।
ख़ुद ही सोचकर देख लिजीए, अगर कोई आपसे कुछ ज़बरदस्ती कार्य करवाये और आप करते ही जाओगे क्या। नही बिलकुल नही जैसे ही मौक़ा मिलेगा बदल जाओगे या भाग जाऔगे। आप कुछ देर या कुछ दिनों तक किसी मजबूरी के कारण सहन कर लेंगे लेकीन पुरे जिवन नही।